Friday, March 10, 2017

श्लोक in श्रीरामरक्षास्तोत्रम् –सूत्रम्॥ तिप्तस्झिसिप्थस्थमिब्वस्मस्तातांझथासाथांध्वमिड्वहिमहिङ्॥ vyakaran in sanskrit

श्लोक in श्रीरामरक्षास्तोत्रम् –
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे |
रामेणाभिहिता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः |
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् |
रामे चित्तलयस् सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ||
 ४।१।२
 (1) सु (2) औ (3) जस् (4) अम् (5) औट् (6) शस् (7) टा (8) भ्यां (9) भिस् (10) ङे (11) भ्यां (12) भ्यस् (13) ङसि (14) भ्यां (15) भ्यस् (16) ङस् (17) ओस् (18) आं (19) ङि (20) ओस् (21) सुप्
सूत्रम्॥ तिप्तस्झिसिप्थस्थमिब्वस्मस्तातांझथासाथांध्वमिड्वहिमहिङ्॥ ३।४।७८

धातोः, तिप्-तस्-झि, सिप्-थस्-थ, मिप्-वस्-मस् (परस्मैपदम्), त-आताम्-झ, थास्-आथाम्-ध्वम्, इट्-वहि-महिङ् (आत्मनेपदम्) इत्येते अष्टादश आदेशाः

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु । वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् | 

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