Sunday, May 17, 2026

नागवंश का श्राप

 

नागवंश का श्राप

(10 मिनट की शॉर्ट फिल्म स्क्रिप्ट)

विषय:

कर्म, पीयर प्रेशर, बौद्धिक बेईमानी और प्रारब्ध




दृश्य 1

कॉलेज कैंटीन — दिन (2 मिनट)

कॉलेज कैंटीन छात्रों से भरी हुई है।
दीवारों पर पोस्टर लगे हैं—

“क्रांति ज़िंदाबाद!”
“सिस्टम तोड़ो!”
“इंकलाब ही समाधान है!”

सुबोध अपने दोस्तों—राहुल, नेहा और विक्रम—के साथ चाय की टेबल पर बैठा है।

राहुल जोश में भाषण दे रहा है।

राहुल

(उत्साहित)
सुबोध भाई, ये पूरा कैपिटलिज्म एक जाल है!
अमीर लोग गरीबों का खून चूसते हैं।
जॉब्स? हाह!
सब उनकी जेब में है।

नेहा

हाँ, न्यूज देखो।
फैक्ट्री वर्कर्स सड़कों पर हैं।
हमें रेवोल्यूशन लाना होगा!

सुबोध चुप बैठा है।
उसे पता है कि बातें आधी-अधूरी हैं।
डेटा अधूरा है।

सुबोध (मन में)

“ये पूरी सच्चाई नहीं है…
लेकिन अगर मैंने विरोध किया तो?
मैं अकेला पड़ जाऊँगा।”

विक्रम

(हँसते हुए)
सुबोध, तू हमारा हीरो है।
कल डिबेट में साथ देगा ना?

सुबोध हल्का मुस्कुराता है।

सुबोध

(दबाव में)
हाँ भाई… फुल सपोर्ट।

सभी हाई-फाइव करते हैं।

लेकिन कैमरा सुबोध के चेहरे पर टिकता है—
जहाँ उत्साह नहीं, अपराधबोध है।


दृश्य 2

फ्लैशबैक — प्राचीन नागमहल — रात (2 मिनट)

बिजली चमकती है।

एक प्राचीन महल।
दीवारों पर विशाल नागों की आकृतियाँ बनी हैं।
मंदिर के बीचोंबीच नागवंश का सिंहासन।

सुबोध अब एक प्राचीन नागवंशी राजा के रूप में खड़ा है।

उसके सामने नागराज खड़ा है—
चेहरा राहुल जैसा।

नागराज

राजा हरिशचंद्र अन्यायी हैं!
उनके टैक्स से प्रजा मर रही है।
क्रांति लानी होगी।

वह विष से भरा पात्र आगे बढ़ाता है।

राजा सुबोध

(दुविधा में)
लेकिन… वो निर्दोष हैं।
ये अधर्म है।

नागराज

(कठोर स्वर में)
ग्रुप के खिलाफ जाओगे?
नागवंश का मान तोड़ोगे?

पीछे खड़े सैनिक “क्रांति” के नारे लगाने लगते हैं।

सुबोध दबाव में आ जाता है।

राजा सुबोध

(धीरे)
…विष दो।

राजा हरिशचंद्र विष पीते हैं और गिर पड़ते हैं।

अचानक पूरा महल अंधेरे में डूब जाता है।

नागराज की आँखें चमकती हैं।

नागराज

(श्राप देते हुए)
तेरा प्रारब्ध लौटेगा।
जिस धोखे में तूने साथ दिया…
उसी धोखे का शिकार तू बनेगा।

स्क्रीन धुंधली होती है।


दृश्य 3

कॉलेज डिबेट क्लब — शाम (3 मिनट)

ऑडिटोरियम भरा हुआ है।

बैनर लगा है—

“कैपिटलिज्म vs सोशलिज्म”

तालियों के बीच डिबेट शुरू होती है।

विपक्षी छात्र

राहुल जी, आपका डेटा पुराना है।
GDP growth बढ़ रही है।
नई jobs भी बनी हैं।

दर्शक तालियाँ बजाते हैं।

राहुल घबरा जाता है।

राहुल

(गुस्से में)
सब फेक न्यूज है!
सुबोध… कुछ बोल!

सुबोध माइक पकड़ता है।

उसके चेहरे पर दुविधा साफ है।

सुबोध (मन में)

“मुझे पता है ये पूरी सच्चाई नहीं…
फिर भी मैं झूठ का साथ दे रहा हूँ।”

सुबोध

(धीरे)
हाँ… कैपिटलिज्म शोषण करता है।
प्रजा का दमन होता है।

दर्शकों में शोर मच जाता है।

कुछ लोग हूटिंग करते हैं।

डिबेट विपक्ष जीत जाता है।


बैकस्टेज

राहुल गुस्से में फोन चला रहा है।

राहुल

(धीरे, बदले की भावना से)
मेरी इज़्ज़त गई…
अब इसकी भी जाएगी।

वह सोशल मीडिया पर फेक पोस्ट डालता है—

“सुबोध एंटी-नेशनल है।”

कुछ ही देर में पोस्ट वायरल हो जाती है।

सुबोध का फोन बजता है।

फोन कॉल (ऑफ स्क्रीन)

“Sorry Subodh… आपकी नौकरी की offer cancel की जाती है।”

सुबोध स्तब्ध।

सुबोध

राहुल… तूने ये किया?

राहुल

(हँसते हुए)
ग्रुप loyalty टेस्ट था, भाई।
तू पास नहीं हुआ।

राहुल चला जाता है।

सुबोध अकेला खड़ा रह जाता है।

सुबोध (मन में)

“गलती राहुल की नहीं…
मैं जानता था क्या सही है।
फिर भी डर में बह गया।”


दृश्य 4

रात का जंगल — क्लाइमेक्स (2 मिनट)

घना जंगल।
चारों ओर कोहरा।

सुबोध अकेला चल रहा है।

अचानक फुफकार की आवाज़।

धुएँ में नागराज का भूत प्रकट होता है।

उसका चेहरा राहुल जैसा है।

नागराज भूत

पूर्व जन्म याद आया, सुबोध?

सुबोध

(डरते हुए)
हाँ…
मैं जानता था कि मैं गलत हूँ।
फिर भी साथ दिया।

नागराज भूत

यही कर्म का विष है।
जब इंसान सत्य जानते हुए भी
भीड़ के पीछे चलता है।

अचानक पीछे से राहुल भागता हुआ आता है।

राहुल

सुबोध!
सॉरी भाई…
मैं पोस्ट delete कर दूँगा!

अचानक उसका पैर फिसलता है।

झाड़ियों से एक नागिन निकलती है—

और उसे काट लेती है।

राहुल

(तड़पते हुए)
आह्ह…!
ये… श्राप…?

सुबोध उसकी ओर भागता है।

सुबोध

(आँखों में आँसू)
तेरा कर्म…
मेरा प्रारब्ध…
सब लौट आया।

नागराज का भूत धीरे-धीरे अंधेरे में विलीन हो जाता है।


दृश्य 5

कॉलेज ग्राउंड — सुबह (1 मिनट)

सुबह की धूप।

कॉलेज ग्राउंड शांत है।

सुबोध अकेला बैठा है।

उसके हाथ में एक किताब है—

“सत्य और आत्मबोध”

दूर से पुराने दोस्त उसे देखते हैं,
लेकिन इस बार वह उनकी ओर नहीं देखता।

उसके चेहरे पर पहली बार शांति है।

वॉयसओवर — सुबोध

“पीयर प्रेशर इंसान को
उसकी आत्मा से दूर कर देता है।

बुरा कर्म हमेशा चीखकर नहीं आता…
कभी-कभी वह दोस्ती, विचारधारा
और स्वीकार किए जाने की चाह में छिपा होता है।

लेकिन सत्य…
अंत में हमेशा लौटता है।”

कैमरा धीरे-धीरे ऊपर उठता है।

घास पर एक छोटा नाग रेंगता हुआ दिखाई देता है—

और स्क्रीन काली हो जाती है।

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