Sunday, May 17, 2026

Chapter 1: संस्कृत-वर्णमालां Subject : Sanskrit

 वर्ण-भाषा की सबसे छोटी इकाई (ध्वनि) को वर्ण कहते है। और वर्णों के समूह को वर्णमाला कहते है ।

संस्कृत वर्ण दो प्रकार के होते हैं:


वर्ण -

1-स्वर 2.व्यंजन 3.आयोगवाह


स्वर -

जिन वर्णों को बोलने के लिए दूसरे वर्ण की सहायता न लेनी पड़े। उन्हें स्वर कहते है। तीन प्रकार के होते हैं।

1. हृस्व स्वर - अ, इ, उ, ऋ, लृ 


2.दीर्घ स्वर - आ, ई, ऊ, ऋ 


 3. संयुक्त स्वर - ए. ऐ, ओ, औ 


व्यंजन - जिन वर्णो के उच्चारण में स्वर की सहायता लेनी पड़े। उन्हें व्यंजन वर्ण कहते हैं। (33)


स्पर्श वर्ण  -  वे व्यंजन होते हैं जिनका उच्चारण करते समय जीभ मुख के किसी भाग को स्पर्श करती है।
हिंदी में स्पर्श व्यंजन पाँच वर्गों में होते हैं —

  1. क-व्यंजन  – क, ख, ग, घ, ङ

  2. च-व्यंजन  – च, छ, ज, झ, ञ

  3. ट-व्यंजन – ट, ठ, ड, ढ, ण

  4. त-व्यंजन - त, थ, द, ध, न

  5. प-व्यंजन  – प, फ, ब, भ, म 


इनकी संख्या - (25)



अंतस्थ वर्ण-जिन वर्णों को बोलने में वायु अन्दर ही रह जाए उन्हें अंतस्थ वर्ण कहते हैं।

य, र, ल, व-(4)

ऊष्म वर्ण- जिन वर्णों को बोलने में गरम वायु मुख से बाहर आए उन्हें ऊष्म वर्ण कहते हैं।

श, ष, स, ह-(4)


वर्णविच्छेद - शब्द को उसके वर्णों में बाँटना।
उदाहरण:

  • गजः →ग्+अ+ज्+अ:


वर्णसंयोजन -वर्णों को मिलाकर शब्द बनाना।
उदाहरण:

  • र् + आ + म + अ: → रामः


अनुस्वारः -चिन्हः –( .)
उदाहरण:

  • पंकज, संगीतम्, 

विशेषताः

  • यह हमेशा स्वर के ऊपर लिखा जाता है।

  • यह संज्ञा और क्रिया दोनों में प्रयुक्त होता है।


विसर्गः -यह शब्द के अंत में लिखा जाता है।

चिन्हः –(:)
उदाहरण:

  • पुनः,रामः 



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