Monday, April 10, 2023

महाभारत के कई भाग हैं -जो आमतौर पर अपने आप में एक अलग और पूर्ण पुस्तकें मानी जाती हैं। मुख्य रूप से इन भागों को अलग से महत्व दिया जाता है:-

 

महाभारत के कई भाग हैं 

जो आमतौर पर अपने आप में एक अलग और पूर्ण पुस्तकें मानी जाती हैं। मुख्य रूप से इन भागों को अलग से महत्व दिया जाता है:-

भगवद गीता श्री कृष्ण द्वारा भीष्मपर्व में अर्जुन को दिया गया उपदेश।

दमयन्ती अथवा नल दमयन्तीअरण्यकपर्व में एक प्रेम कथा।

कृष्णवार्ता : भगवान श्री कृष्ण की कहानी।

राम रामायण का अरण्यकपर्व में एक संक्षिप्त रूप।

ॠष्य ॠंग एक ॠषि की प्रेम कथा।

विष्णुसहस्रनाम विष्णु के १००० नामों की महिमा शान्तिपर्व में।

महाभारत के दक्षिण एशिया मे कई रूपान्तर मिलते हैंइण्डोनेशियाश्रीलंकाजावा द्वीपजकार्ताथाइलैंडतिब्बत, बर्मा (म्यान्मार) में महाभारत के भिन्न-भिन्न रूपान्तर मिलते हैं। दक्षिण भारतीय महाभारत मे अधिकतम १,४०,००० श्लोक मिलते हैं, जबकि उत्तर भारतीय महाभारत के रूपान्तर मे १,१०,००० श्लोक मिलते हैं।

अठारह की संख्या

महाभारत की मूल अभिकल्पना में अठारह की संख्या का विशिष्ट योग हैं। कौरव और पाण्डव पक्षों के मध्य हुए युद्ध की अवधि अठारह दिन थी। दोनों पक्षों की सेनाओं का सम्मिलित संख्याबल भी अठारह अक्षौहिणी था। इस युद्ध के प्रमुख सूत्रधार भी अठारह हैं।महाभारत की प्रबन्ध योजना में सम्पूर्ण ग्रंथ को अठारह पर्वों में विभक्त किया गया हैं और महाभारत में भीष्म पर्व के अन्तर्गत वर्णित श्रीमद्भगवद्गीता में भी अठारह अध्याय हैं। सम्पूर्ण महाभारत अठारह पर्वों में विभक्त हैं।

No comments:

Post a Comment

भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) क्या है?

  भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) :  1. भारतीय ज्ञान प्रणाली क्या है? भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) ज्ञान का एक विशाल भंडार है, जो हजारों वर्षों ...