Tuesday, April 18, 2023

भाति मे भारतम्. - ( संस्कृतकाव्यम्)

 भाति मे भारतम्. - ( संस्कृतकाव्यम्)

निर्जरैर्योगिभिर्भोगिभिश्चार्थितं भूतले भाति मेनारतं भारतम् ॥ मानव, दानव, सज्जन, दुर्जन, धनवान्, निर्धन, बलवान्. निर्बल, देवता, योगी तथा भोगी - सभी जिसे चाहते ऐसा मेरा भारत भूमण्डल मे अनवरत सुशोभित हो रहा है। anagerनोपासनापद्धति- कोडनानीवसंस्कारवत्यादिषु ।

No comments:

Post a Comment

6th पाठ:-5 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि अभ्यास कार्य

 6th पाठ:-5 अहं प्रातः उत्तिष्ठामिअभ्यास कार्य  Grade : VI                                                 Subject : Sanskrit  Ch...