25 सूक्तियों को विद्यालय प्रार्थना सभा, संस्कृत भाषण, प्रतियोगिता, पोस्टर, तथा "प्रतिदिन एक संस्कृत सूक्ति" कार्यक्रम में उपयोग किया जा सकता है।
१. सर्वे भवन्तु सुखिनः।
अर्थ: सभी सुखी हों।
२. मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।
अर्थ: कोई भी दुःखी न हो।
३. वसुधैव कुटुम्बकम्।
अर्थ: सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है।
४. धर्मो रक्षति रक्षितः।
अर्थ: धर्म की रक्षा करने वाले की धर्म रक्षा करता है।
५. योगः कर्मसु कौशलम्।
अर्थ: कर्मों में कुशलता ही योग है।
६. लोभः पापस्य कारणम्।
अर्थ: लोभ पाप का कारण है।
७. विद्या ददाति विनयम्।
अर्थ: विद्या विनम्रता प्रदान करती है।
८. विद्याविहीनः पशुः।
अर्थ: विद्या के बिना मनुष्य पशु के समान है।
९. वाग्भूषणं भूषणम्।
अर्थ: मधुर वाणी सबसे श्रेष्ठ आभूषण है।
१०. शीलं परं भूषणम्।
अर्थ: सदाचार सबसे बड़ा आभूषण है।
११. शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।
अर्थ: शरीर ही धर्म का प्रथम साधन है।
१२. साहसे श्रीः प्रतिवसति।
अर्थ: लक्ष्मी साहसी व्यक्तियों के पास रहती है।
१३. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।
अर्थ: आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
१४. उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
अर्थ: कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
१५. सत्यमेव जयते।
अर्थ: सत्य की ही विजय होती है।
१६. न हि सत्यात् परो धर्मः।
अर्थ: सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
१७. अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम्॥ अर्थ: बड़ों का सम्मान करने वाले की आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।
१८. स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।
अर्थ: राजा अपने देश में, विद्वान् सर्वत्र सम्मानित होता है।
१९. सहसा विदधीत न क्रियाम्।
अर्थ: बिना विचार किए कोई कार्य नहीं करना चाहिए।
२०. हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः।
अर्थ: हितकारी और प्रिय वचन दोनों एक साथ मिलना दुर्लभ है।
२१. संतोषः परमं सुखम्।
अर्थ: संतोष ही सर्वोत्तम सुख है।
२२. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
अर्थ: माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।
२३. नमन्ति फलिनो वृक्षाः नमन्ति गुणिनो जनाः।
अर्थ: फलयुक्त वृक्ष और गुणवान व्यक्ति विनम्र होते हैं।
२४. परोपकारार्थमिदं शरीरम्।
अर्थ: यह शरीर परोपकार के लिए है।
२५. उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।
अर्थ: उदार हृदय वाले लोगों के लिए पूरी पृथ्वी परिवार है।
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