Thursday, June 11, 2026

इन 25 सूक्तियों को विद्यालय प्रार्थना सभा, संस्कृत भाषण, प्रतियोगिता, पोस्टर, तथा "प्रतिदिन एक संस्कृत सूक्ति" कार्यक्रम में उपयोग किया जा सकता है।

25 सूक्तियों को विद्यालय प्रार्थना सभा, संस्कृत भाषण, प्रतियोगिता, पोस्टर, तथा "प्रतिदिन एक संस्कृत सूक्ति" कार्यक्रम में उपयोग किया जा सकता है।

१. सर्वे भवन्तु सुखिनः।


अर्थ: सभी सुखी हों।


२. मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।


अर्थ: कोई भी दुःखी न हो।


३. वसुधैव कुटुम्बकम्।


अर्थ: सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है।


४. धर्मो रक्षति रक्षितः।


अर्थ: धर्म की रक्षा करने वाले की धर्म रक्षा करता है।


५. योगः कर्मसु कौशलम्।


अर्थ: कर्मों में कुशलता ही योग है।


६. लोभः पापस्य कारणम्।


अर्थ: लोभ पाप का कारण है।


७. विद्या ददाति विनयम्।


अर्थ: विद्या विनम्रता प्रदान करती है।


८. विद्याविहीनः पशुः।


अर्थ: विद्या के बिना मनुष्य पशु के समान है।


९. वाग्भूषणं भूषणम्।


अर्थ: मधुर वाणी सबसे श्रेष्ठ आभूषण है।


१०. शीलं परं भूषणम्।


अर्थ: सदाचार सबसे बड़ा आभूषण है।


११. शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।


अर्थ: शरीर ही धर्म का प्रथम साधन है।


१२. साहसे श्रीः प्रतिवसति।


अर्थ: लक्ष्मी साहसी व्यक्तियों के पास रहती है।


१३. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।


अर्थ: आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।


१४. उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।


अर्थ: कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।


१५. सत्यमेव जयते।


अर्थ: सत्य की ही विजय होती है।


१६. न हि सत्यात् परो धर्मः।


अर्थ: सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं।


१७. अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।


चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम्॥ अर्थ: बड़ों का सम्मान करने वाले की आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।


१८. स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।


अर्थ: राजा अपने देश में, विद्वान् सर्वत्र सम्मानित होता है।


१९. सहसा विदधीत न क्रियाम्।


अर्थ: बिना विचार किए कोई कार्य नहीं करना चाहिए।


२०. हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः।


अर्थ: हितकारी और प्रिय वचन दोनों एक साथ मिलना दुर्लभ है।


२१. संतोषः परमं सुखम्।


अर्थ: संतोष ही सर्वोत्तम सुख है।


२२. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।


अर्थ: माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।


२३. नमन्ति फलिनो वृक्षाः नमन्ति गुणिनो जनाः।


अर्थ: फलयुक्त वृक्ष और गुणवान व्यक्ति विनम्र होते हैं।


२४. परोपकारार्थमिदं शरीरम्।


अर्थ: यह शरीर परोपकार के लिए है।


२५. उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।


अर्थ: उदार हृदय वाले लोगों के लिए पूरी पृथ्वी परिवार है।



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