Thursday, June 11, 2026

श्रीमद्जगत गुरु शंकराचार्य भगवान

श्री गुरुवे नमः
श्री राम जय राम जय जय राम,
अकारण करुणा वरूणालय अभय चरणान विदम , 
चक्रचूर्णामणि राजराजेश्वरानंद, श्री ऋग्वेद पूरी वामनाय गोवर्धन पीठाधीश्वर श्रीमद्जगत गुरु शंकराचार्य भगवान के श्री चरणों कमलों में दंडवत प्रणाम समर्पित करता हूं।

 मैं ब्रह्मलीन भगवान शंकराचार्य एवम धर्म सम्राट करपात्री जी के चरणों में प्रणाम करता हूं , मैं प्रणाम करता हूं उस गुरु 
परंपरा को जो भगवान नारायण से आरंभ होती है, और इस कल्प में अभी तक 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख 49हजार 122 वर्ष हो चुके हैं भगवान नारायण के पुत्र ब्रह्मा,ब्रह्मा के वशिष्ठ वशिष्ठ के शक्ति, शक्ति के पाराशर, पाराशर के वेदव्यास, वेदव्यास के सुखदेव, सुखदेव के शिष्य गोदपादाचार्य, और गोडपादाचार्य के शिष्य आचार्य गोविंदाचार्य गोविंदाचार्य के बाद भगवान शंकराचार्य जी।

भगवान नारायण से अगर गुरु शिष्य परंपरा का बोध किया जाए तो भगवान शंकराचार्य का स्थान दसवां है मैं प्रणाम करता हूं हमारी उस गुरु शिष्य परम्परा को जिसके कारण आज भी भारत का अस्तित्व बचा है।

प्रणाम करता हूं उसे गुरु परंपरा को जो नारायण से चली आ रही है।
भगवान शंकराचार्य को समझना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है भगवान शंकराचार्य को समझना अवतारवाद बात को समझने के बराबर है।

शंकराचार्य को जानना यूनिटी इन डाइवर्सिटी को जानना है
भगवान शंकराचार्य को जाना नेशनल इंटीग्रेशन को जानना है भगवान शंकराचार्य को जानना सोशल रिफॉर्म को जानना है समाज सुधारक को जाना है भगवान शंकराचार्य को जानना
 सनातन धर्म की पुनर स्थापना को जानना है

ढाई हजार वर्ष से वर्तमान तक सतत नित्य निरंतर अनवरत, सनातन धर्म के प्रशस्त मान बिंदुओं की रक्षा करने का श्रेय किसी को जाता है, तो वो जाता है, भगवान शंकराचार्य जी को।

शंकराचार्य की परंपरा ना होती भगवान शंकराचार्य का अवतार ना हुआ होता तो ढाई हजार वर्षों में सनातन धर्म की क्या दुर्गति हुई होती यह समझ जा सकता है और १७ इन्वेंजन होते हैं हम पर आक्रमण होते हैं 

भारत पर इतिहास उठा के देखिए आप
533 बीसी में डॉलर्स आता है पर्सियन किंग वह आक्रमण करता है उसके बाद 247 बी सी सिकंदर आता है उसके बाद डीमैटरस आता है इंडो ग्रीक, उसके बाद पार्थियंस आते है ईरान से वो आक्रमण करते है।

भारत पर उसके बाद में शक,शकों के बाद कूसान, फिर हून आते है, उसके बाद में अरब इन्वेंजन होता है, फिर दोबारा महमूद गजनवी आता है, उसके मुहम्मद गौरी आता है, फिर 1206 में गुलाम वंश की स्थापना होती है, दिल्ली सल्तनत की, जिसके अंदर 
चार 
डायनिसतीज आती है, उसके बाद में उसी समय चंगेज खा भी आता है, फिर मुगल आते है, फिर ब्रिटिश, फ्रेंच, डच आते है,
फॉरचुजीग आते है,

सारी आक्रांताओं को हमने सह लिया झेल लिया उसकी कठोर समस्याओं को हमने सहकर के अपने जीवन को आगे बढ़ाया लेकिन फिर भी हम कहीं ना कहीं अपने अस्तित्व में आज भी स्थापित है बच गए बहुत बड़ी बात है, 

येइतिहास उठाकर अगर हम आज भी देखते हैं
लेकिन फिर भी हम बच गए अनेकों सभ्यताएं मिट गई छठ भ्रष्ट हो गई समाप्त हो गई नष्ट भ्रष्ट ध्वस्त काल कवलित चूर चूर व समाप्त हो गई। वो मिस्त्र की सभ्यता समाप्त होंगी, वो रोमन साम्राज्य समाप्त हो गया।
वह यूनान की सभ्यता समाप्त होगी वह बेबी लोन खत्म हो गया। वो ख़तम हो गया वह पर्शियन साम्राज्य है।

हम बच निश्चित रूप से तो हमारी संस्कृति में ऐसा क्या है, जो आज भी हम बच गए,हमारी संस्कृति की रक्षा करने का जी दायित्व था। वो शंकराचार्य परंपरा के ऊपर था।

और अगर शंकरचार्य ने अपने दायित्वों का निर्वहन बहत दक्षता पूर्वक किया।
शंकराचार्य की परम्परा में सनातन धर्म की प्रशस्त मान बिंदुओं की ढाई हजार वर्षों से अधिक वर्षों से रक्षा करी जा रही है।


 कई बार युद्ध को जिला यहां 17 बार बहुत विशाल युद्ध हुआ जिसमें भारत के संस्कृति को सभ्यता को यहां के धर्म को बहुत क्षति हुई जिसके कारण यह बहुत सारी परेशानियां हुई बहुत कुछ बदलाव हुआ।


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thisdiscussion between student and teachers in classes room
time. 45 minutes

श्री गुरुवे नमः। श्री राम जय राम जय जय राम।

यह 45 मिनट की कक्षा में छात्र और शिक्षक के बीच संवाद पर आधारित हिंदी फिल्म स्क्रिप्ट है, जो आपके दिए गए प्रवचन को पूरी तरह समाहित करती है। यह शंकराचार्य परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन धर्म की रक्षा और भारत के आक्रमणों के इतिहास पर केंद्रित है।

## दृश्य 1: कक्षा का प्रारंभ (0-5 मिनट)
**स्थान:** स्कूल की कक्षा। 20 छात्र, एक मुख्य शिक्षक (श्रीमती सरला) और एक अतिथि शिक्षक (पंडित जी)। घड़ी में सुबह 10 बजे। छात्र नोट्स लेने को तैयार।

**[कैमरा छात्र राहुल पर ज़ूम। वह हाथ जोड़कर खड़ा होता है।]**

**राहुल (भावुक स्वर में):**  
श्री गुरुवे नमः। श्री राम जय राम जय जय राम। अकारण करुणा वरूणालय अभय चरणान विदम, चक्रचूर्णामणि राजराजेश्वरानंद... श्री ऋग्वेद पूरी वामनाय गोवर्धन पीठाधीश्वर श्रीमद्जगत गुरु शंकराचार्य भगवान के श्री चरणों कमलों में दंडवत प्रणाम। मैं ब्रह्मलीन भगवान शंकराचार्य एवं धर्म सम्राट करपात्री जी के चरणों में प्रणाम करता हूं।

**[सभी छात्र हाथ जोड़ते हैं। शिक्षक मुस्कुराते हैं।]**

**श्रीमती सरला (मुख्य शिक्षक):**  
बहुत सुंदर, राहुल। आज हम सनातन धर्म की उस गुरु परंपरा पर चर्चा करेंगे जो भगवान नारायण से आरंभ होकर आज तक चली आ रही है। पंडित जी, कृपया शुरूआत करें।

## दृश्य 2: गुरु-शिष्य परंपरा (5-15 मिनट)
**पंडित जी (अतिथि शिक्षक, वेद पाठ की पुस्तक खोलते हुए):**  
बच्चो, यह परंपरा भगवान नारायण से शुरू होती है। इस कल्प में 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 122 वर्ष हो चुके हैं। नारायण के पुत्र ब्रह्मा, ब्रह्मा के वशिष्ठ, वशिष्ठ के शक्ति, शक्ति के पाराशर, पाराशर के वेदव्यास, वेदव्यास के सुखदेव, सुखदेव के शिष्य गोदामााचार्य, गोदामाचार्य के शिष्य आचार्य गोविंदाचार्य... और गोविंदाचार्य के बाद भगवान शंकराचार्य जी। भगवान नारायण से गुरु-शिष्य परंपरा का बोध करें तो शंकराचार्य का स्थान दसवां है।[2][6]

**छात्रा सीता (उत्सुकतापूर्वक):**  
सर, यह परंपरा ही तो भारत का अस्तित्व बचा रही है न?

**पंडित जी:**  
बिल्कुल सीता। प्रणाम उस गुरु परंपरा को जो नारायण से चली आ रही है। भगवान शंकराचार्य को समझना अवतारवाद को समझने के बराबर है। शंकराचार्य को जानना यूनिटी इन डाइवर्सिटी को जानना है, नेशनल इंटीग्रेशन को जानना है, सोशल रिफॉर्म को जानना है, सनातन धर्म की पुनर्स्थापना को जानना है।[10]

**[कक्षा में तालियां। कैमरा छात्रों के चेहरों पर।]**

## दृश्य 3: सनातन धर्म की रक्षा (15-25 मिनट)
**राहुल:**  
सर, ढाई हजार वर्ष से सतत, नित्य, निरंतर, अनवरत सनातन धर्म के प्रशस्त मान बिंदुओं की रक्षा का श्रेय शंकराचार्य जी को जाता है। अगर उनकी परंपरा न होती तो क्या दुर्गति हो जाती?

**श्रीमती सरला:**  
सही कहा राहुल। शंकराचार्य ने चार मठ स्थापित किए - द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी, जोशीमठ। इनकी परंपरा ने हिंदू धर्म को मजबूत रखा।[2][6]

**पंडित जी:**  
और इतिहास देखो बच्चो। भारत पर 17 आक्रमण हुए। 533 ई.पू. में डेरियस (पर्सियन किंग), 247 ई.पू. सिकंदर, डीमैटेरस (इंडो-ग्रीक), पार्थियंस, शक, कुषाण, हूण, अरब आक्रमण, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, 1206 में गुलाम वंश, दिल्ली सल्तनत की चार dynasties, चंगेज खां, मुगल, ब्रिटिश, फ्रेंच, डच, पुर्तगाली। सभी को झेला, लेकिन हम बचे रहे। मिस्र, रोमन, यूनान, बेबीलोन, पर्शियन सभ्यताएं मिट गईं, हमारी नहीं। कारण? शंकराचार्य परंपरा![2]

**छात्र विशाल:**  
सर, युद्धों ने कितना नुकसान किया?

**पंडित जी:**  
बहुत विशाल युद्ध हुए, संस्कृति को क्षति पहुंची, लेकिन शंकराचार्य परंपरा ने धर्म की रक्षा की। आज भी चार शंकराचार्य सनातन के संरक्षक हैं।[10]

## दृश्य 4: चर्चा और प्रश्नोत्तरी (25-40 मिनट)
**[छात्र प्रश्न पूछते हैं। ब्लैकबोर्ड पर गुरु वंश क्रम लिखा जाता है।]**

**सीता:**  
शंकराचार्य सोशल रिफॉर्मर कैसे?

**श्रीमती सरला:**  
उन्होंने बौद्ध, जैन आदि से शास्त्रार्थ जीतकर अद्वैत वेदांत स्थापित किया। समाज को एकता दी, मठों से शिक्षा दी।[2]

**राहुल:**  
आज भी प्रासंगिक क्यों?

**पंडित जी:**  
क्योंकि यूनिटी इन डाइवर्सिटी हमारा मूलमंत्र है। शंकराचार्य को जानना भारत को जानना है।

**[ग्रुप डिस्कशन: छात्र जोड़ियां बनाकर बात करते। समय बीतता।]**

## दृश्य 5: समापन (40-45 मिनट)

**श्रीमती सरला:**  

बच्चो, आज हमने जाना कि शंकराचार्य परंपरा ने 2500 वर्षों से धर्म बचाया। होमवर्क: गुरु परंपरा पर निबंध लिखो।

**सभी छात्र (एक स्वर में):**  
श्री गुरुवे नमः! जय श्री राम!

**[फेड आउट: कक्षा की घंटी बजती है। छात्र प्रणाम करते हुए जाते हैं। स्क्रीन पर शंकराचार्य मठों की तस्वीर। एंड क्रेडिट्स।]**

यह स्क्रिप्ट 45 मिनट की है - संवाद 70%, विजुअल्स/ट्रांज़िशन 30%। शैक्षणिक, भावपूर्ण और आपके प्रवचन को शब्दशः शामिल।[2][6][10]


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