Sunday, June 7, 2026

।। भारत ।। आओ सब मिलकर अपनी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचय कराये। ओर उसको मिलकर एक दूसरे के साथ आगे बढ़ाएं।

 आओ सब मिलकर अपनी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचय कराये। ओर उसको मिलकर एक दूसरे के साथ आगे बढ़ाएं।


।। भारत ।।


भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत है।


भारत एक विविध संस्‍कृति वाला देश है, एक तथ्‍य कि यहां यह बात इसके लोगों, संस्‍कृति और मौसम में भी प्रमुखता से दिखाई देती है। हिमालय की अनश्‍वर बर्फ से लेकर दक्षिण के दूर दराज में खेतों तक, पश्चिम के रेगिस्‍तान से पूर्व के नम डेल्‍टा तक, सूखी गर्मी से लेकर पहाडियों की तराई के मध्‍य पठार की ठण्‍डक तक, भारतीय जीवनशैलियां इसके भूगोल की भव्‍यता स्‍पष्‍ट रूप से दर्शाती हैं।


भारतीय संस्‍कृति अपनी विशाल भौगोलिक स्थिति के समान अलग अलग है। यहां के लोग अलग अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग अलग तरह के कपड़े पहनते हैं, भिन्‍न भिन्‍न धर्मों का पालन करते हैं, अलग अलग भोजन करते हैं किन्‍तु उनका स्‍वभाव एक जैसा होता है। तो चाहे यह कोई खुशी का अवसर हो या कोई दुख का क्षण, लोग पूरे दिल से इसमें भाग लेते हैं, एक साथ खुशी या दर्द का अनुभव करते हैं। एक त्‍यौहार या एक आयोजन किसी घर या परिवार के लिए सीमित नहीं है। पूरा समुदाय या आस पड़ासे एक अवसर पर खुशियां मनाने में शामिल होता है, इसी प्रकार एक भारतीय विवाह मेल जोल का आयोजन है, जिसमें न केवल वर और वधु बल्कि दो परिवारों का भी संगम होता है। चाहे उनकी संस्‍कृति या धर्म का मामला हो। इसी प्रकार दुख में भी पड़ोसी और मित्र उस दर्द को कम करने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


भारत में एक अन्‍य व्‍यापक रूप से प्रचलित विचाराधारा है कर्म की विचाराधारा, जिसके अनुसार प्रत्‍येक व्‍यक्ति को केवल सही कार्य करना चाहिए या एक व्‍यक्ति के रूप में इसके जीवन के पूर्ण वृत्त में वे ही तथ्‍य उसके सामने आते हैं।


क्या आज हमें भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने में अपना योगदान नहीं देना चाहिए? 


अगर हाँ-


तो आओं हम सब मिलके 


" मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा " 


रास्ते कदम मिला के एकसाथ चले।


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