Wednesday, August 23, 2023

मानव सदैव यही सोचता रहता है।ब्रह्मवादिनो वदन्ति-किं कारणं ब्रह्म कुत:

मानव सदैव यही सोचता रहता है।
ब्रह्मवादिनो वदन्ति-

किं कारणं ब्रह्म कुत: स्म जाता जीवाम केन क्व च संप्रतिष्ठा:।
अधिष्ठिता: केन सुखेतरेषु वर्तामहे ब्रह्मविदो
 व्यवस्थाम्।।
अर्थ-ब्रह्म का वर्णन करने वाले कहते है, इस (जगत्) का कारण क्या है, इस (जगत्) का कारण क्या है? हम कहाँ से उत्पन्न है? कहाँ स्थित है? (कैसे स्थित है?)यह सुख-दु:ख क्यों होता है? ब्रह्म की जिज्ञासा करने वाला यह जानना चाहते हैं। उत्पन्न हुआ जो तत्व है यह सब क्या है, क्यों हैं? इत्यादि।

No comments:

Post a Comment

ये परीक्षा नही है, धैर्य और आत्मविश्वास का सूचक है

ये परीक्षा नही है, धैर्य और आत्मविश्वास का सूचक है  ॐ विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्र त्वात् धन माप्नोति धनात् धर्मं ततः सु...