Tuesday, May 8, 2018

देयमार्त्तस्य शयनं

देयमार्त्तस्य शयनं
         स्थित:श्रान्तस्य चासनम्।
तृषितस्य च पानीयं
          क्षुधितस्य च भोजनम्।।
चक्षुर्दद्यान्मनो दद्याद्वाचं
                दद्यात्सुभाषितं ।
उत्थाय चासनं दद्याद् -
          - ऐषधर्म:  सनातन:    ।।महाभारत।।

रोग पीड़ित को शयन के लिये स्थान, थके हुए को आसन, प्यासे को पानी, भूखे को भोजन देना चाहिये ।
आये हुए को प्रेम की दृष्टी से देखें , मन से चाहें, मीठी वाणी बोलें, उठकर आसन दें - यही सनातन धर्म ह।

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