भारत सरकार ने स्कूलों में संस्कृत को “अनिवार्य” करने जैसा कोई एक सामान्य राष्ट्रीय नियम नहीं बनाया है। लेकिन शिक्षा नीति में संस्कृत और भारतीय भाषाओं को लेकर कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान जरूर हैं।
मुख्य नियम/नीतियाँ (Current Education Policy)
1. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020)
National Education Policy 2020 के अनुसार:
- स्कूलों में मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा को प्राथमिकता दी जाएगी।
- संस्कृत को विकल्प (elective language) के रूप में मजबूत किया गया है।
- विद्यार्थी तीन भाषाएँ सीख सकते हैं (Three Language Formula), जिनमें संस्कृत भी चुनी जा सकती है।
- किसी भी भाषा को पूरे देश में “अनिवार्य” नहीं किया गया है।
2. त्रिभाषा सूत्र (Three Language Formula)
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कम से कम 3 भाषाएँ पढ़ाई जाती हैं:
- मातृभाषा / क्षेत्रीय भाषा
- हिंदी या अंग्रेज़ी
- एक अन्य भाषा (यह संस्कृत भी हो सकती है)
3. CBSE स्कूल नियम
Central Board of Secondary Education में:
- संस्कृत कक्षा 6 से 12 तक एक विषय के रूप में उपलब्ध है
- लेकिन यह optional subject है, अनिवार्य नहीं
4. नई पहल (भारतीय भाषाएँ)
सरकार भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दे रही है:
- संस्कृत सहित अन्य शास्त्रीय भाषाएँ (Tamil, Telugu, Kannada, Malayalam आदि)
- डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन संसाधनों के माध्यम से
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