भारत सरकार/CBSE का स्कूलों के लिए नियम (2026 तक का अपडेट)
1. नई शिक्षा नीति (NEP 2020)
National Education Policy 2020 के अनुसार:
- किसी भी भाषा को पूरे देश में अनिवार्य (compulsory) नहीं किया गया है
- स्कूलों को बहुभाषी शिक्षा (multilingual education) देना जरूरी है
- मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा को प्राथमिकता दी जाती है
- संस्कृत सहित सभी भारतीय भाषाएँ विकल्प (optional) के रूप में उपलब्ध हैं
👉 यानी: संस्कृत सीखना जरूरी नहीं है, लेकिन उपलब्ध जरूर है
2. CBSE का नया नियम (2026 से लागू)
Central Board of Secondary Education के अनुसार:
- कक्षा 6 से 10 तक 3 भाषाएँ पढ़ना जरूरी
- इनमें से कम से कम 2 भारतीय भाषाएँ होनी चाहिए
-
तीसरी भाषा (R3) में छात्र चुन सकते हैं:
- संस्कृत
- या कोई अन्य भारतीय भाषा
- या कुछ स्कूलों में विदेशी भाषा (शर्तों के साथ)
महत्वपूर्ण बात:
- कोई भी भाषा (Hindi/Sanskrit) अनिवार्य नहीं है
- लेकिन कई स्कूलों में विकल्प सीमित होने के कारण संस्कृत अक्सर चुननी पड़ती है
3. CBSE का क्लास 10 नियम
- तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा
- लेकिन स्कूल स्तर पर मूल्यांकन होगा
आसान निष्कर्ष
👉 सरकार ने संस्कृत को “अनिवार्य नहीं” किया है
👉 लेकिन इसे एक मजबूत विकल्प (option) के रूप में बढ़ावा दिया है
👉 हर छात्र अपनी सुविधा और स्कूल के विकल्प के अनुसार भाषा चुन सकता है
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