Class 9 Sanskrit sharada chapter 1 question answer
संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्ति। इस पाठ में कवि पण्डित वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदि ने संस्कृत की महिमा का गुणगान 6 श्लोकों में किया है। यह गीत बताता है कि संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य में सुसंस्कार आते हैं और भारतीय एकता, ज्ञान, शान्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्ति
परिचय :
इस पाठ में कवि पण्डित वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदी ने संस्कृत भाषा की महिमा का वर्णन छह श्लोकों में किया है। इस गीत के माध्यम से बताया गया है कि संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य में सुसंस्कार उत्पन्न होते हैं तथा भारतीय एकता, ज्ञान, शान्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्लोक १ का भावार्थ
प्रश्न : प्रथमे श्लोके संस्कृतस्य किं वर्णनम् अस्ति?
उत्तर :
प्रथमे श्लोके कविः कथयति यत् संस्कृतं भारतीयानाम् ऐक्यं साधयति, भारतीयत्वं सम्पादयति, ज्ञानसमूहस्य प्रभां दर्शयति, सर्वदा आनन्दस्य परम्परां जनयति च।
हिन्दी :
पहले श्लोक में कवि कहते हैं कि संस्कृत भारतीयों में एकता लाती है, भारतीयत्व प्रदान करती है, ज्ञान के भण्डार का प्रकाश दिखाती है तथा सदा आनन्द की परम्परा उत्पन्न करती है।
श्लोक २ का भावार्थ
प्रश्न : द्वितीये श्लोके संस्कृतस्य किं कार्यं वर्णितम्?
उत्तर :
द्वितीये श्लोके वर्णितम् अस्ति यत् संस्कृतं सर्वेषां जनानां मानसं शोधयति, वचनानि परिष्करोति, सन्मार्गं दर्शयति, सद्गुणानां समूहम् उत्पादयति।
हिन्दी :
दूसरे श्लोक में बताया गया है कि संस्कृत सभी लोगों के मन को शुद्ध करती है, वाणी को परिष्कृत करती है, सन्मार्ग दिखाती है तथा सद्गुणों का विकास करती है।
श्लोक ३ का भावार्थ
प्रश्न : तृतीये श्लोके संस्कृतेन किं किं साध्यते?
उत्तर :
तृतीये श्लोके उक्तम् यत् संस्कृतं विश्वबन्धुत्वं वर्धयति, सर्वेषां प्राणिनाम् ऐक्यं बोधयति, सर्वत्र शान्तिं प्रतिष्ठापयति, पञ्चशीलस्य मार्गं दर्शयति च।
हिन्दी :
तीसरे श्लोक में कहा गया है कि संस्कृत विश्वबन्धुत्व को बढ़ाती है, सभी प्राणियों में एकता की भावना उत्पन्न करती है, सर्वत्र शान्ति स्थापित करती है तथा पंचशील के मार्ग का उपदेश देती है।
श्लोक ४, ५ एवं ६ का भावार्थ
प्रश्न : चतुर्थ-पञ्चम-षष्ठश्लोकेषु संस्कृतस्य किं महत्त्वम् उक्तम्?
उत्तर :
एतेषु श्लोकेषु उक्तम् यत् संस्कृतेन त्याग, सन्तोष तथा सेवा का व्रत प्राप्त होता है। धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्ञान और विज्ञान का समन्वय होता है। संस्कृत शब्दों का लीलावन, माधुर्य का धाम तथा पूर्वजों के यश का स्मारक है।
हिन्दी :
इन श्लोकों में बताया गया है कि संस्कृत त्याग, सन्तोष एवं सेवा का संदेश देती है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराती है। यह ज्ञान और विज्ञान का संगम, शब्दों का उद्यान तथा पूर्वजों की कीर्ति का स्मारक है।
प्रश्न २ — एकपदेन उत्तरं लिखत
यथा —
ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं किम्? — संस्कृतम्।
(क) संस्कृतं कस्याः साधकम्? — भारतीयैकतायाः।
(ख) सर्वदा संस्कृतं कस्य सन्दोहदम्? — आनन्दस्य।
(ग) संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम्? — सत्पथस्य।
(घ) संस्कृतं कासां परिष्कारकम्? — सर्ववाणीनाम्।
(ङ) कस्य विस्तारकं संस्कृतम्? — विश्वबन्धुत्वस्य।
प्रश्न ३ — पूर्णवाक्येन उत्तरम्
(क) सर्वतः कस्याः संस्थापकं संस्कृतम्?
उत्तर : सर्वतः शान्तेः संस्थापकं संस्कृतम्।
(ख) कीदृशं व्रतं संस्कृतम्?
उत्तर : संस्कृतं त्यागसन्तोषसेवाव्रतम् अस्ति।
(ग) कयोः सम्मेलनं संस्कृतम्?
उत्तर : ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनं संस्कृतम्।
(घ) संस्कृतं कस्य चमत्कारकम्?
उत्तर : संस्कृतं विश्वचेतसः चमत्कारकम्।
(ङ) केषां यशः स्मारकं संस्कृतम्?
उत्तर : पूर्वजानाम् यशः स्मारकं संस्कृतम्।
प्रश्न ४ — रिक्तस्थानानि पूरयन्तु
(क) भारतीयत्वसम्पादकं संस्कृतम्।
(ख) ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं संस्कृतम्।
(ग) सर्वमस्तिष्कसंस्कारकं संस्कृतम्।
(घ) कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं संस्कृतम्।
(ङ) सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्।
(च) शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्।
प्रश्न ५ — मञ्जूषा-वाक्यरचना
(क) 'एकता' पदेन वाक्यं रचयत।
उत्तर — संस्कृतं भारतीयैकतासाधकं भवति।
(ख) 'सर्वतः' पदेन वाक्यं रचयत।
उत्तर — संस्कृतं सर्वतः शान्तिसंस्थापकं भवति।
(ग) 'सेवा' पदेन वाक्यं रचयत।
उत्तर — संस्कृतं त्यागसन्तोषसेवाव्रतं भवति।
(घ) 'विश्वकल्याणाय' पदेन वाक्यं रचयत।
उत्तर — संस्कृतं विश्वकल्याणाय निष्ठायुतं भवति।
(ङ) 'पूर्वजानाम्' पदेन वाक्यं रचयत।
उत्तर — संस्कृतं पूर्वजानाम् यशःस्मारकं भवति।
(च) 'विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्' पदेन वाक्यं रचयत।
उत्तर — संस्कृतं विश्वबन्धुत्वविस्तारकम् अस्ति।
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